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गणगौर गीत

Gangaur Geet Lyrics

आइये जानते हैं गणगौर की पूरी कहानी

Ⓠ गणगौर उत्सव क्या है, हम इसे क्यों मनाते है❓

🅰️ गणगौर भारत के कुछ राज्यों जैसे की राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मुख्य रूप से मनाया जाने वाला एक प्रमुख उत्सव है। यह पर्व भगवान शिव जी और माता पार्वती को अर्पित है । इसे वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और पति की लम्बी उम्र महिलाएं और कवारी लड़किया उत्तम वर की प्राप्ति के लिए मनाती है।

गणगौर त्योहार का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘गण’ जिसका का अर्थ भगवान शिव है और ‘गौर’ जिसका का अर्थ माता पार्वती है, जो अपने गौर रुप के कारण ‘गौरा’ कहलाती हैं।

Ⓠ गणगौर कब और कैसे मनाया जाता है❓

🅰️ गणगौर का त्योहार होली के अगले दिन से शुरू होकर 16 से 18 दिनों तक चलता है और चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को समाप्त होता है।

Gangaur Geet Lyrics
Gangaur Geet Lyrics

यहाँ इस त्योहार से जुड़ी प्रमुख बातों का विवरण दिया गया है:

पहलूविवरण
मुख्य देवताभगवान शिव जी  और माता पार्वती |
उद्देश्यविवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं मनचाहा और अच्छा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं |
मुख्य अनुष्ठान• महिलाएं 16-18 दिनों तक व्रत रखती हैं और दिन में केवल एक बार भोजन ग्रहण करती हैं |
• मिट्टी या लकड़ी की शिव-पार्वती की मूर्तियों की पूजा दो महिलाएं या कन्याएं जोड़ी में करती हैं । इन मूर्तियों को रोजाना नए कपड़े, गहने, श्रृंगार की चीजें, फल, फूल और मिठाई अर्पित की जाती हैं |
• महिलाएं रोज़ सोलह श्रृंगार करती हैं, मेंहदी लगाती हैं और पारंपरिक गणगौर गीत गाती हैं |
• आखिरी दिन, मूर्तियों को एक भव्य शोभायात्रा में निकाला जाता है और किसी तालाब या जलाशय में विसर्जित कर दिया जाता है। इसे माता पार्वती के विदाई के रूप में देखा जाता है |
विशेष व्यंजनइस त्योहार पर विशेष रूप से घेवर मिठाई बनाई और बांटी जाती है
प्रमुख स्थानभारत के कुछ राज्यों जैसे की राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मनाया जाता है, विशेष रूप से राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और जोधपुर में यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। उदयपुर में तो झील पिछोला पर स्थित गणगौर घाट बड़ी प्रसिद्ध है ।

Ⓠ मुख्य कथा क्या है❓

🅰️ गणगौर त्योहार से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं, जिन्हें व्रत कथा के रूप में सुना जाता है:

पहली कथा: एक बार भगवान शिव, माता पार्वती और नारद जी पृथ्वी भ्रमण पर निकले। एक गाँव में, गरीब महिलाओं ने बड़े भक्ति भाव से उनका स्वागत किया। माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उन महिलाओं को अटल सौभाग्य का वरदान दिया। बाद में अमीर महिलाएं भी पूजा करने आईं, लेकिन माता पार्वती के पास देने के लिए कुछ नहीं बचा था। तब माता ने अपनी ही उंगली काटकर अपना रक्त उन महिलाओं पर छिड़क दिया, जिससे वे भी सौभाग्यशाली हो गईं। इसके बाद माता पार्वती ने नदी में स्नान कर रेत का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव जी की आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने वरदान दिया कि जो भी स्त्री इस दिन व्रत करेगी, उसका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।

दूसरी कथा: यह भी मान्यता है कि गणगौर के दिनों में माता पार्वती अपने मायके आती हैं। अंतिम दिन भगवान शिव उन्हें लेने आते हैं, और फिर उनकी विदाई होती है। इसलिए इसे पार्वती जी के मायके और ससुराल से जोड़कर देखा जाता है।

जोधपुर की विशेष परंपरा: ढींगा गवर

जोधपुर में गणगौर का एक अनूठा रूप ढींगा गवर के नाम से मनाया जाता है। ‘ढींगा’ का अर्थ है छल-मजाक। इस अवसर पर महिलाएं पुलिस, डाकू, आदिवासी आदि का वेश धारण करती हैं और हाथों में डंडा (बैंत) लेकर गणगौर की मूर्ति की रक्षा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि जिस भी अविवाहित युवक पर यह डंडा पड़ता है, उसकी जल्दी ही शादी हो जाती है। इसलिए इसे बैंतमार तीज भी कहते हैं।

गणगौर त्योहार की झलक

गणगौर केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और स्त्री शक्ति का प्रतीक है। यह पर्व सौभाग्य, समृद्धि और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा है। अगर आप राजस्थान की संस्कृति और इस त्योहार की झलक देखना चाहते हैं, तो मार्च-अप्रैल के महीने में जयपुर या उदयपुर की यात्रा करना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है।


गणगौर गीत