महिषासुर और दुर्गा माँ की उत्पत्ति: जब महिषासुर नाम के राक्षस ने दुनिया में कोहराम मचा रखा था और अपने वरदान के कारण उसमें घमंड आ गया था। तब सभी देवी देवताओं ने आदि शक्ति का आवाहन किया और अपनी शक्तियों से दुर्गा माँ के अवतार को जन्म दिया। संसार से अंधेरा मिटाने के लिए और धर्म की रक्षा करने के लिए दुर्गा माँ का प्राकट्य हुआ है यानी महिषासुर का अंत। महिषासुर से वो 9 दिनों की जंग, 9 दिन नवरात्रों का प्रतीक है।
- Durga Chalisa padhne ke niyam
- Durga Mata Ke Lokpriya Aur Pramukh Mandiron Ki List
- श्री दुर्गा चालीसा पाठ
- Shree Durga Chalisa Lyrics in Hindi
- Shree Durga Chalisa Lyrics in English
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Durga Chalisa importance
हर दिन दुर्गा माँ के एक नए अवतार की पूजा की जाती है। मगर इन 9 दिनों तक रोज़ दुर्गा चालीसा पढ़ने का एक अलग महत्व है। घर में सुख समृद्धि आती है, डर दूर हो जाता है और शक्ति मिलती है। दुर्गा चालीसा मे देवी के 9 रूपो का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है, उनकी शक्तियो का, माँ की तरह प्यार और दया का वर्णन है।
Durga Chalisa ka mahatva:
① बुरी नज़रों से बचाती है।
② नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है।
③ सुख समृद्धि मिलती है।
④ डर दूर होता है।
⑤ इच्छा पूर्ति होती है।
⑥ तनाव दूर होता है।
⑦ एकाग्रता बढ़ती है।
⑧ ध्यान (फोकस) बढ़ता है।
⑨ कुंडली दोष कम होता है।
Kab Padhna Chahiye:
नवरात्रि, नवरात्रे, गुप्त नवरात्रि, नवदुर्गा, माता की चौकी, दुर्गा पूजा, देवी जागरण, दुर्गा अष्टमी, जगराता, तथा शुक्रवार के शुभ अवसर पर श्री दुर्गा चालीसा ज़रूर पढ़े।
Durga Chalisa padhne ke niyam
ऐसे ही अनगिनत फायदे होते हैं दुर्गा चालीसा रोज़ पढ़ने से। मगर इसको पढ़ने के कुछ नियम होते हैं:
- सबसे पहले मंदिर को साफ़ करे।
- दुर्गा माँ की तस्वीर के आगे एक घी का दिया जलाओ।
- माता को फल फूल चढाये।
- और फिर सच्चे मन से दुर्गा चालीसा का पाठ करे।
दुर्गा चालीसा का निमियात सच्चे मन से पाठ करने से फल अच्छे मिलते है।
Durga Mata Ke Lokpriya Aur Pramukh Mandiron Ki List
| Mandir Ka Naam | Sthan (Location) |
|---|---|
| Vaishno Devi Mandir | Katra, Jammu aur Kashmir |
| Kamakhya Mandir | Guwahati, Assam |
| Kalighat Kali Mandir | Kolkata, Pashchim Bengal |
| Dakshineswar Kali Mandir | Kolkata, Pashchim Bengal |
| Jwala Devi Mandir | Kangra, Himachal Pradesh |
| Naina Devi Mandir | Bilaspur, Himachal Pradesh |
| Chamunda Devi Mandir | Kangra, Himachal Pradesh |
| Vindhyavasini Devi Mandir | Vindhyachal, Uttar Pradesh |
| Durga Kund Mandir | Varanasi, Uttar Pradesh |
| Mansa Devi Mandir | Haridwar, Uttarakhand |
| Ambaji Mandir | Banaskantha, Gujarat |
| Pavagadh Mahakali Mandir | Panchmahal, Gujarat |
| Meenakshi Amman Mandir | Madurai, Tamil Nadu |
| Kanyakumari Amman Mandir | Kanyakumari, Tamil Nadu |
| Mahalakshmi Mandir | Kolhapur, Maharashtra |
| Tripur Sundari Mandir | Udaipur, Tripura |
| Karni Mata Mandir | Deshnoke, Rajasthan |
| Danteshwari Devi Mandir | Dantewada, Chhattisgarh |
श्री दुर्गा चालीसा पाठ
मंत्र:
विद्या प्राप्ति मंत्र (शिक्षा के लिए):या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
तेज बुद्धि और सफलता के लिए मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
शक्ति और आत्मविश्वास के लिए:
ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः॥
Shree Durga Chalisa Lyrics in Hindi
।। दोहा।।
शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे नि:शंक ।
मैं आया तेरी शरण में, मातु लिजिये अंक ॥
भावार्थ:
जो आपकी शरण में आता है, आप उसकी रक्षा करती हैं और आपके भक्त निडर हो जाते हैं।
हे माँ! मैं भी आपकी शरण में आया हूँ, मुझे अपने आँचल में छिपा लीजिए।
।। दोहा।।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उनको नमन, उनको नमन, उनको बार-बार नमन।
यह श्लोक कहता है – उस शक्ति को, जो हर कण में बसी है, हर सांस में मौजूद है, हम बार-बार नमन करते हैं।
आम जीवन में मतलब:
जब आप यह श्लोक बोलते हैं, तो सिर्फ किसी मूर्ति को नहीं, बल्कि उस शक्ति को नमन करते हैं जो आपके अंदर भी है, आपके आसपास भी है। यह एहसास दिलाता है कि शक्ति बाहर कहीं ढूंढने की चीज़ नहीं, वह तो हर जीव के भीतर पहले से मौजूद है।
श्री दुर्गा चालीसा हिंदी अर्थ सहित
।। चौपाई।।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ १ ॥
हे माँ दुर्गा! आपको बार-बार प्रणाम, आप सुख देने वाली हैं।
हे माँ अम्बे! आपको बार-बार प्रणाम, आप दुःख हरने वाली हैं।
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥ २ ॥
आपका प्रकाश निराकार है, बिना किसी रूप-रंग के।
तीनों लोकों में आपकी ही रोशनी फैली हुई है।
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ ३ ॥
आपका माथा चाँद की तरह चमकता है और आपका मुख बहुत विशाल है।
आपकी लाल-लाल आँखें और उभरी हुई भौहें देखकर बुरी ताकतें काँप उठती हैं।
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥ ४ ॥
हे माँ! आपका स्वरूप बड़ा मनमोहक है।
जो भी आपके दर्शन करता है, उसे अपार सुख और शांति मिलती है।
तुम संसार शक्ति लय कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ ५ ॥
आपने ही इस संसार की सारी शक्तियाँ संभाल रखी हैं।
जगत का पालन करने के लिए आप ही अन्न और धन देती हैं।
अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
तुम ही आदि सुंदरी बाला ॥ ६ ॥
अन्नपूर्णा के रूप में आप पूरे जगत का पालन करती हैं।
और आप ही वह आदि शक्ति हैं, जो सुन्दरी बाला के रूप में भी जानी जाती हैं।
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ॥ ७ ॥
प्रलय के समय सब कुछ नष्ट करने वाली भी आप ही हैं।
आप ही गौरी हैं, भोलेनाथ शंकर की प्रियतमा।
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ ८ ॥
भगवान शिव और सभी योगी आपके गुण गाते हैं।
ब्रह्मा और विष्णु भी हर समय आपका ही ध्यान करते हैं।
रूप सरस्वती का तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ ९ ॥
आप सरस्वती का रूप धारण करती हैं।
ऋषियों-मुनियों को सद्बुद्धि देकर आप उनका उद्धार करती हैं।
धरयो रूप नरसिंह को अंबा ।
परगट भयि फाड के खंबा ॥ १० ॥
हे माँ अम्बा! आपने ही नरसिंह का रूप लिया था।
खम्भे को चीरकर आप प्रकट हुई थीं, प्रह्लाद को बचाने के लिए।
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ ११ ॥
आपने प्रह्लाद की रक्षा की और उसे बचा लिया।
हिरण्यकश्यप को मारकर आपने उसे मुक्ति दिला दी।
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥ १२ ॥
आप लक्ष्मी का रूप धरकर इस जगत में विराजती हैं।
और भगवान नारायण के साथ वैकुण्ठ में निवास करती हैं।
क्षीरसिंधु में करत विलासा ।
दयासिंधु दीजै मन आसा ॥ १३ ॥
क्षीरसागर में आप विष्णु के साथ विलास करती हैं।
हे दया के सागर! मेरे मन की आशा पूरी कीजिए।
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥ १४ ॥
हिंगलाज में आप ही भवानी के रूप में विराजती हैं।
आपकी महिमा अपार है, बयान नहीं की जा सकती।
मातंगी धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ १५ ॥
आप ही मातंगी हैं, धूमावती माता हैं।
भुवनेश्वरी और बगलामुखी के रूप में भी आप सुख देने वाली हैं।
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ १६ ॥
आप भैरवी हैं, तारा हैं, जगत को तारने वाली हैं।
छिन्नमस्ता के रूप में आप जन्म-मरण के दुःख दूर करती हैं।
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ १७ ॥
हे भवानी! सिंह पर सवार आप बड़ी शोभायमान लगती हैं।
आपसे आगे-आगे वीर हनुमान चलते हैं।
कर में खप्पर खडग विराजे ।
जाको देख काल डर भाजे ॥ १८ ॥
आपके हाथों में खप्पर और तलवार सुशोभित है।
जिसे देखकर काल खुद डरकर भाग जाता है।
सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ १९ ॥
आपके अस्त्र-शस्त्र और त्रिशूल देखकर
शत्रुओं के हृदय में तीर सा चुभ जाता है।
नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँ लोक में डंका बाजत ॥ २० ॥
नगरकोट में आप विराजती हैं।
तीनों लोकों में आपकी ही धाक बजती है।
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥ २१ ॥
आपने शुम्भ-निशुम्भ जैसे राक्षसों को मार गिराया।
रक्तबीज का भी आपने संहार किया।
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ २२ ॥
महिषासुर राजा बड़ा अभिमानी था।
उसके पापों के भार से पृथ्वी व्याकुल हो उठी थी।
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ २३ ॥
आपने भयंकर कालिका का रूप धारण किया।
उस महिषासुर को उसकी पूरी सेना समेत मार गिराया।
परी गाढ़ संतन पर जब जब ।
भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ २४ ॥
जब-जब संतों पर संकट आया,
तब-तब हे माँ! आपने उनकी सहायता की।
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब कहें अशोका ॥ २५ ॥
अमरपुरी और इंद्रलोक में
आपकी महिमा से सब दुःखरहित होकर रहते हैं।
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ २६ ॥
ज्वाला जी में आपकी ज्योति जलती है।
सभी नर-नारी सदा आपकी पूजा करते हैं।
प्रेम भक्ति से जो यश गावें ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥ २७ ॥
जो प्रेम और भक्ति से आपका यश गाता है,
उसके पास दुःख और गरीबी कभी नहीं आते।
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।
जन्म मरण ते सौं छुट जायि ॥ २८ ॥
जो मन लगाकर आपका ध्यान करता है,
उसका जन्म-मरण का चक्र मिट जाता है।
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ २९ ॥
योगी, देवता और मुनि पुकार-पुकारकर कहते हैं –
आपकी शक्ति के बिना योग नहीं हो सकता।
शंकर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ ३० ॥
शंकराचार्य ने कठोर तप किया।
उस तप से उन्होंने काम और क्रोध को जीत लिया।
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ ३१ ॥
वे रात-दिन केवल शंकर का ही ध्यान करते रहे।
कभी उन्होंने आपको याद ही नहीं किया।
शक्ति रूप को मरम न पायो ।
शक्ति गयी तब मन पछतायो ॥ ३२ ॥
वे आपके शक्ति-स्वरूप का रहस्य न समझ सके।
जब उनकी सारी शक्तियाँ जाती रहीं, तब उन्हें पछतावा हुआ।
शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदंब भवानी ॥ ३३ ॥
तब वे आपकी शरण में आए और आपकी महिमा बखानने लगे।
भयि प्रसन्न आदि जगदंबा ।
दयि शक्ति नहिं कीन विलंबा ॥ ३४ ॥
तब आदि जगदम्बा प्रसन्न हुईं।
बिना देर किए उन्होंने शंकराचार्य को उनकी शक्तियाँ लौटा दीं।
मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ ३५ ॥
हे माँ! मैं बहुत कष्टों में घिरा हुआ हूँ।
आपके बिना मेरा दुःख कौन हरेगा?
आशा तृष्णा निपट सतावें ।
रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैं ॥ ३६ ॥
इच्छाएँ और तृष्णाएँ मुझे बहुत सताती हैं।
कृपा कर मेरे मोह, अहंकार और सब विकारों का नाश कर दीजिए।
शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ ३७ ॥
हे महारानी! मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए।
हे भवानी! मैं एकाग्र मन से आपको याद करता हूँ।
करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । ३८ ॥
हे दयालु माता! मुझ पर कृपा कीजिए।
मुझे ऋद्धि-सिद्धि देकर कृतार्थ कर दीजिए।
जब लगि जियूँ दया फल पावूँ ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनावूँ ॥ ३९ ॥
जब तक जीऊँ, आपकी कृपा का फल पाता रहूँ।
और आपका यश सदा सबको सुनाता रहूँ।
दुर्गा चालीसा जो गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥ ४० ॥
जो भी इस श्री दुर्गा चालीसा को गाता है,
वह सब सुख भोगता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है।
देवीदास शरण निज जानी ।
करहु कृपा जगदंब भवानी ॥
यह जानकर कि देवीदास आपकी शरण में आया है,
हे जगदम्ब भवानी! उस पर कृपा कीजिए।
।। दोहा।।
शरणागत रक्षा कर,
भक्त रहे निःशंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लीजिए अंक।।
इति श्री दुर्गा चालीसा पाठ पूर्ण |

Shree Durga Chalisa Lyrics in English
|| Doha ||
Ya Devi Sarvbhuteshu Shaktirupen Sansthitha.
Namastesayee Namastesayee, Namastesayee Namo Namah.
|| Chaupai ||
Namo namo Durge sukh karani |
Namo namo Ambe dukh harani || 1 ||
Nirankar hai jyoti tumhari
Tihun lok pheli ujayari || 2 ||
Shashi lalat mukh maha vishala |
Netra lal brikuti vikrala || 3 ||
Roop matu ko adhika suhave |
Daras karat jan ati sukh pave || 4 ||
Tum sansar shakti laya kina |
Palan hetu anna dhan dina || 5 ||
Annapurna hui jag pala |
Tumhi adi sundari bala || 6 ||
Pralaya kal sab nashan hari |
Tum Gauri Shiv Shankar pyari || 7 ||
Shiv yogi tumhare gun gave |
Brahma Vishnu tumhe nit dhyaven || 8 ||
Roop Saraswati ko tum dhara |
De subudhi rishi munin ubara || 9 ||
Dharyo roop Narsimha ko Amba |
Pragat bhayin phar kar kamba || 10 ||
Raksha kari Prahalad bachayo |
Hiranakush ko swarg pathayo || 11 ||
Lakshmii roop dharo jag mahi |
Shree Narayan ang samahi || 12 ||
Ksheree Sindhu karat vilasa |
Daya Sindhu deejay man aasa || 13 ||
Hingalaj mein tumhi Bhavani |
Mahima amit na jaat bakhani || 14 ||
Matangi Dhoomavati Mata |
Bhuvneshwari Bagala Sukhdata || 15 ||
Shree Bairav Tara jog tarani |
Chin-na Bhala bhav dukh nivarani || 16 ||
Kehari Vahan soh Bhavani |
Langur veer chalat agavani || 17 ||
Kar men khappar khadag viraje |
Jako dekh kal dar bhaje || 18 ||
Sohe astra aur trishoola |
Jase uthata shatru hiya shoola || 19 ||
Nagarkot mein tumhi virajat |
Tihun lok mein danka bajat || 20 ||
Shumbhu Nishumbhu Danuja tum mare |
Rakta-beeja shankhan samhare || 21 ||
Mahishasur nripa ati abhimani |
Jehi agha bhar mahi akulani || 22 ||
Roop kaaral Kalika dhara |
Sen sahita tum tin samhara || 23 ||
Pari garha santan par jab jab |
Bhayi sahaya Matu tum tab tab || 24 ||
Amarpuri aru basava loka |
Tava mahima sab rahen asoka || 25 ||
Jwala mein hai jyoti tumhari |
Tumhen sada pujan nar nari || 26 ||
Prem bhakti se jo yash gaye |
Dukh-daridra nikat nahin ave || 27 ||
Dhyave tumhen jo nar man laee |
Janam-maran tako chuti jaee || 28 ||
Jogi sur-muni kahat pukari |
Jog na ho bin shakti tumhari || 29 ||
Shankar Aacharaj tap keenhon |
Kam krodh jeet sab leenhon || 30 ||
Nisidhin dhyan dharo Shanker ko |
Kahu kal nahin sumiron tum ko || 31 ||
Shakti roop ko maram na payo |
Shakti gayi tab man pachitayo || 32 ||
Sharnagat hui keerti bakhani |
Jai jai jai Jagdamb Bhavani || 33 ||
Bhayi prasanna Aadi Jagdamba |
Dayi shakti nahin keen vilamba || 34 ||
Mokun Matu kashta ati ghero |
Tum bin kaun hare dukh mero || 35 ||
Asha trishna nipat sataven |
Moh madadik sab binsaven || 36 ||
Shatru nash keeje Maharani |
Sumiron ekachita tumhen Bhavani || 37 ||
Karo kripa hey Matu dayala |
Riddhi-Siddhi de karahu nihala || 38 ||
Jab lagi jiyoon daya phal paoon |
Tumro yash mein sada sunaoon || 39 ||
Durga chalisa jo gaye |
Sab sukh bhog parampad pave || 40 ||
Devidas sharan nij jani |
Karahu kripa Jagdamb Bhavani ||
|| Doha ||
Sharanagat raksha kar,
Bhakta rahe nishank.
Main aaya teri sharan mein,
Matu lijiye ank.
ithi Sri Durga Chalisa sampurnam ||
Shree Durga Chalisa YouTube Video
| 🎵 Song Details and Credits | |
|---|---|
| 📀 Album Name | DURGA CHALISA DURGA KAWACH |
| 📌 Song Name | Durga Chalisa |
| 🎤 Singer Name | Anuradha Paudwal |
| ✍️ Songs Lyrics | Traditional |
| 🎧 Music Director | Durga Prasad |
| 🏷️ Company Label | T-Series |
| 🗓️ Release Date | 5 / October / 2013 |
Durgaa Chalisa – Bhajan Sanatan
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जय माता दी ||
दुर्गा माँ की कृपा सदैव आप और आपके परिवार पर बनी रहे ||
Sampoorn Shri Durga Chalisa PDF Download
Durga Mata Ke Vrat, Parv Aur Mahatvapurna Tithiyan (2026)
| Durga Mata Ke Vrat, Parv | Tithi (Date) |
|---|---|
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