उज्जैनी की नगरी में,
बाबा महाँकाल है,
क्या गजब है इनका दरबार,
रोज शुबह शाम होता,
रूप शंगार है,
भगत है आते दरबार।।
देखो क्या अजब से,
है गजब से यहाँ के नजारे है,
चल के पालकी में,
हाल सुनने भगतो के आते है,
चन्द्रमौलि रूप में भगतो से मिलने,
आते है बाबा महाँकाल,
रोज शुबह शाम होता,
रूप शंगार है,
भगत है आते दरबार।।
नैया बिन महाँकाल,
के पार कैसे लग सकती है,
छिप्रा नदी भी यंहा,
कल कल बहती ही रहती है,
सच्चा ये दरबार है,
लगती जय जयकार है,
बनती है बिगड़ी सभी की,
रोज शुबह शाम होता,
रूप शंगार है,
भगत है आते दरबार।।
बाबा महाँकाल के,
दर पे ही अब तो रहना है,
इस दर के सिवा अब,
नही दूजा कोई सहारा है,
तुम भी चल के देख लो,
इस दरबार को,
ओर लगाओ जयकारे,
रोज शुबह शाम होता,
रूप शंगार है,
भगत है आते दरबार।।
उज्जैनी की नगरी में,
बाबा महाँकाल है,
क्या गजब है इनका दरबार,
रोज शुबह शाम होता,
रूप शंगार है,
भगत है आते दरबार।।
Singer – Deepak Chaudhary
Ujjain Ki Nagari Mei Baba Mahakal Hai Bhajan Lyrics
https://www.youtube.com/watch?v=9aRpYvJ_CUQ